विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी ( एस एस पी )

निर्यातक के लिए निर्यात ऋण बीमा


विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी ( एस एस पी )

विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी – अल्पावधि (विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी – अल्पावधि) भारतीय निर्यातक को 180 दिनों तक के अल्पावधि ऋण पर माल के निर्यात में निहित वाणिज्यिक व राजनीतिक जोखिम पर रक्षा प्रदान करती है। निर्यातक इन पॉलिसियों के अंतर्गत संविदा के अधीन खरीदार को किए जानेवाले पोतलदानों पर रक्षा ले सकता है ।

  • ये पॉलीसियाँ इनके द्वारा ली जा सकती हैं
  • निर्यातक जिन्होंने एससीआर पॉलिसी नहीं ली है, निर्यातक जिनके पास एससीआरपॉलिसी है, उन पोतलदानों के संबंध में जिन्हें एससीआर पॉलिसी के सीमा क्षेत्र से अपवर्जित करने की अनुमति दी गई है ।

विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी (अल्पावधि) के विभिन्न प्रकार क्या हैं ?

एसएसपी – एसटी के विभिन्न प्रकार

  • विशिष्ट शिपमेंट (वाणिज्यिक व राजनीतिक जोखिम) पॉलिसी – अल्पावधि
  • विशिष्ट शिपमेंट (राजनीतिक जोखिम) पॉलिसी – अल्पावधि
  • विशिष्ट शिपमेंट (साख पत्र खोलनेवाले बैंक का दिवालियापन अथवा चूक तथा राजनीतिक जोखिम) पॉलिसी – अल्पावधि

विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी (अल्पावधि) के अंतर्गत संरक्षित जोखिम

विशिष्ट पोतलदान पॉलिसी (अल्पावधि) के अंतर्गत निगम शिपमेंट की तिथि से निम्नलिखित जोखिमों को रक्षा प्रदान करता है :

क़ वाणिज्यिक जोखिम

I. विदेशी खरीदारों पर रक्षित जोखिम :

  • खरीदार का दिवालिया होना।
  • खरीदार द्वारा निर्धारित अवधि में भुगतान करने में विफलता जो साधारणतया देय तारीख से 4 माह तक होती है।
  • कुछ शर्तों के अधीन खरीदार द्वारा वस्तुओं को स्वीकार न करना।

II. साख – पत्र खोलने वाले बैंक का जोखिम :

  • साख – पत्र खोलने वाले बैंक का दिवालिया होना।
  • साख – पत्र खोलने वाले बैंक द्वारा निर्धारित अवधि में भुगतान करने में विफलता जो साधारणतया देय तारीख से 4 माह तक होती है।

ख़ राजनीतिक जोखिम

  • खरीदार के देश की सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाना या कोई अन्य सरकारी कार्रवाई जिससे खरीदार द्वारा किए गए भुगतान अंतरण में अवरोध या विलम्ब उत्पन्न हो,
  • खरीदार के देश में युद्‌ध, गृह युद्‌ध, क्रांति या नागरिक उपद्रव। नये आयात प्रतिबंध अथवा वैध आयात लाईसेंस रद्‌द किया जाना।
  • भारत के बाहर समुद्री यात्रा में रूकावट या मार्ग परिवर्तन जिसके फलस्वरूप भाड़े या बीमा शुल्क की ऐसी अतिरिक्त अदायगी जिसकी राशि खरीदार से वसूल नहीं की जा सकती,
  • भारत से बाहर होने वाली क्षति का कोई ऐसा कारण जिसके लिए साधारण बीमाकर्ता द्वारा संरक्षण प्रदान नहीं किया जाता है और जो निर्यातक और खरीदार दोनों के नियंत्रण के परे हो।

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