अल्पावधि पॉलिसियाँ

खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


one ख पॉ ( अल्पावधि ) के अधीन किन जोखिमों पर रक्षा प्रदान की जाती है ?


वाणिज्यिक जोखिम :


( ख पॉ – अल्पावधि , खरीदारवार अल्पावधि पॉलिसीयां ( वाणिज्यिक तथा राजनीतिक जोखिमों ) – अल्पावधि)

खरीदार का दिवालियापन


निर्धारित अवधि , समान्यतया भुगतान की देय तारीख के एक माह के भीतर खरीदार द्वारा भुगतान करने में असमर्थता,
खरीदार द्वारा माल की अस्वीकृति ( कुछ शर्तों के अधीन )

राजनीतिक जोखिम :


( सभी ख पॉ – अल्पावधि , खरीदारवार अल्पावधि पॉलिसीयों के लिए ) खरीदार के देश में सरकार द्वारा लागू प्रतिबंध अथवा सरकार की कोई ऐसी कार्यवाही जिससे खरीदार द्वारा किए जाने वाले भुगतानों के अंतरण में विलंब अथवा अवरुद्ध हो; खरीदार के देश में युद्ध, गृह युद्ध , क्रांति अथवा असैनिक उपद्रव; नए आयात प्रतिबंध अथवा वैध आयात लाइसेन्स का निरसन; भारत के बाहर समुद्री यात्रा का मार्ग परिवर्तन जिसके कारण अतिरिक्त माल भाड़ा अथवा बीमा प्रभार की अदायगी की जानी पड़ी व खरीदार से जिसकी वसूली नहीं की जा सकती

साखपत्र खोलने वाले बैंक की दिवालियापन चूक

( सभी ख पॉ – अल्पावधि , खरीदारवार अल्पावधि पॉलिसीयों के लिए ) साख पत्र खोलने वाले बैंक का दिवालियापन व चूक तथा राजनीतिक जोखिम )

साख पत्र खोलने वाले बैंक का दिवालियापैन ;

देय तारीख की निर्धारित अवधि , समान्यतया देय तारीख से चार महीनों के भीतर साख पत्र खोलने वाले बैंक द्वारा भुगतान करने में असमर्थता;


खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


twoख पॉ ( अल्पावधि ) के अधीन किन जोखिमों पर रक्षा प्रदान नहीं की जाती है ?


  • खरीदार द्वारा उठाए गए गुणवत्ता विवादों सहित वाणिज्यिक विवाद , जब तक अन्यथा निर्यातक खरीदार के देश में सक्षम न्यायालय से अपने पक्षव में डिक्री प्राप्त नहीं कर लेता ;
  • माल की प्रकृति में निहित कारण ;
  • खरीदार द्वारा अपने देश के प्राधिकारियों से आवश्यक आयात अथवा विनिमय प्राधिकार प्राप्त करने में असमर्थ होना;
  • माल की हानि अथवा क्षति ;
  • विनिमय दर अस्थिरता
  • निर्यातक द्वारा निर्यात संविदा की शर्तों के अनुपालन करने में चूक अथवा उसके द्वारा की गयी लापरवाही.
  • खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    three ख पॉ ( अल्पावधि ) प्राप्त करने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए ?


    निर्यातक को निर्धारित फॉर्म में अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करने होगा। पोतलदान करने के पूर्व प्रस्ताव प्रस्तुत करने होंगे तथा रक्षा प्रस्ताव की तारीख से प्रदान की जाएगी। पॉलिसी जारी करते समय निर्यातक द्वारा अनुमानित अधिकतम बकाए के आधार पर खरीदारवार / बैंकवार सीमा का निर्धारण किया जाएगा।

    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    four क्या एक से अधीन ख़रीदारों को किए जाने वाले निर्यातों पर ख वा ( अल्पावधि ) पॉलिसी जारी की जा सकती है ?


    नहीं, प्रत्येक खरीदार के लिए अलग पॉलिसी प्राप्त की जानी होगी।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    fiveख वा ( अल्पावधि ) की वैधता अवधि क्या है ?


    पॉलिसी एक वर्ष के लिए वैध होगी।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    sixख वा ( अल्पावधि ) द्वारा प्रदत्त रक्षा का प्रतिशत क्या है ?


    पॉलिसी के अधीन उपलब्ध सामान्यतया रक्षा का प्रतिशत संरक्षित पोतलदानों के सकल मूल्य के 80% होगा। तथापि देय प्रीमियम राशि में आनुपातिक कटौती के साथ कम रक्षा के प्रतिशत पर भी पॉलिसी जारी की जाती है।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    seven ख वा ( अल्पावधि ) के अधीन ई सी जी सी की अधिकतम देयता क्या होगी ?


    पॉलिसी के अधीन उपलब्ध सामान्यतया रक्षा का प्रतिशत संरक्षित पोतलदानों के सकल मूल्य के 80% होगा। तथापि देय प्रीमियम राशि में आनुपातिक कटौती के साथ कम रक्षा के प्रतिशत पर भी पॉलिसी जारी की जाती है।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    eight ख वा ( अल्पावधि ) के संबंध में देय ऋण मूल्यांकन शुल्क कितना है ?


    प्रत्येक खरीदार / बैंक के संबंध में खरीदारवार पॉलिसी के लिए प्रस्तावों पर देय ऋण मूल्यांकन शुल्क 1000/- रु होगा। पॉलिसी जारी करने के उपरांत 500/- रु का सीमा विस्तार शुल्क देय होगा जोकि कारोबार की मात्र में विस्तार के फलस्वरूप होता है।

    केवल राजनीतिक जोखिमों पर रक्षा के मामले में किसी प्रकार का ऋण मूल्यांकन शुल्क प्रभारित नहीं होगा।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    nineख वा ( अल्पावधि ) के अधीन लागू प्रीमियम दर क्या हैं ?


    खरीदार अथवा साख पत्र खोलने वाले बैंक के देश के वर्गीकरण तथा भुगतान की शर्तों के आधार पर प्रीमियम दर प्रभारित होंगे तथा पॉलिसी के अधीन संरक्षित जोखिमों के प्रकार यथा व्यापक अथवा राजनीतिक, के आधार पर प्रीमियम दर अलग अलग होंगे।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    ten ख वा ( अल्पावधि ) के अधीन क्या नो क्लेम बोनस उपलब्ध है ?


    जी हाँ


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    eleven ख वा ( अल्पावधि ) के लिए देय प्रीमियम का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है तथा उसकी अदायगी कब की जानी है ?


    प्रस्ताव फॉर्म में प्रस्ताव में उल्लिखित अनुमान तथा लागू प्रीमियम दरों के आधार पर प्रीमियम की गणना की जाएगी । आई आर डी ए आई के नियम 64VB के अनुसार प्रीमियम की अदायगी अग्रिम रूप में की जानी होगी। पॉलिसी जारी करने के पहले अग्रिम प्रीमियम की अदायगी के उपरांत ही पॉलिसी जारी की जाएगी।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    twelve अंतिम तिमाही के पश्चात अतिरिक्त / अल्प प्रीमियम का किस प्रकार समायोजन किया जाता है?


    अंतिम तिमाही के अंत तक परियोजित पण्यावर्त की तुलना में वास्तविक पण्यावर्त अलग हो सकता है। इस प्रकार के मामले में यदि निर्यातक पॉलिसी का नवीकरण करवाता है तो अतिरिक्त अथवा कम प्रीमियम का समायोजन नवीकृत पॉलिसी के प्रीमियम की गणना के समय प्रीमियम का समायोजन किया जाएगा।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    thirteenकिन परिस्थितियों में ख वा ( अल्पावधि ) के अधीन रक्षा समाप्त कर दी जाएगी ?


    निर्यातक को लिखित रूप में सूचित करते हुए ई सी जी सी किसी भी समय रक्षा को वापस ले सकता है। इस प्रकार रक्षा को वापस लेने की तारीख रक्षा समाप्त कर दी जाएगी। उस तारीख के पश्चात उस खरीदार को किए गए पोतलदानों पर खरीदार वार पॉलिसी के अधीन रक्षा उपलब्ध नहीं होगी।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    fourteen ख वा ( अल्पावधि ) के धारक निर्यातक के दायित्व क्या हैं ?



    किए गए पोतलदानों के विवरणों की प्रस्तुति :


    निर्यातक को आगामी माह के 15 तारीख तक पिछले माह में खरीदार वार पॉलिसी के अधीन संरक्षित खरीदार / बैंक के संबंध में किए गए पोतलदानों का विवरण भेजना होगा। उसे अगली तिमाही के दौरान पॉलिसी के अधीन संरक्षित खरीदार / बैंक के संबंध में अगले माह के परियोजित पण्यावर्त को भी दर्शाना होगा। पूर्व माह के दौरान अदा किए गए अतिरिक्त अथवा न्यून प्रीमियम को समायोजित करते हुए माह के लिए परियोजित पण्यावर्त पर प्रीमियम की अदायगी करनी होगी।

    अतिदेय विवरण की प्रस्तुति :


    प्रत्येक माह की 15 तारीख तक अथवा उससे पहले संविदा के अधीन पोतलदानों पर उन भुगतानों का विवरण देना होगा जो देय तारीख से 30 दिनों से अधिक तक अतिदेय रहे हैं।

    जोखिम का कारण बनी घटना की सूचना :


    यदि निर्यातक को ऐसी किसी घटना की जानकारी होती है जो कि जोखिम को संभावतः प्रभावित कर सकती है तो उसे इसकी सूचना 30 दिनों के भीतर ई सी जी सी को देनी होगी

    हानि को कम करने की कार्यवाही :


    किसी भी पोतलदान पर यदि भुगतान नहीं होता है तो तत्काल उपाय किए जाने चाहिए। पोतलदान जिसके लिए पॉलिसी ली गयी है, के लिए भुगतान प्राप्त नहीं होने पर , निर्यातक को तत्काल ही ई सी जी सी द्वारा सुझाए उपाय सहित , हानि को कम करने टालने के उपाय करने होंगे। हानि को टालने / कम करने के उपाय प्रत्येक मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों पर आधारित होंगे। तत्काल की जाने वाली कार्यवाही निम्नानुसार है :

    • खरीदार को भुगतान करने के लिए प्रेरित करना, साथ ही साथ गैर भुगतान के लिए बिल के स्वीकारण सहित उसके खिलाफ कार्यवाही के अधिकार को बनाए रखना;
    • बिल की देय तारीख में आगे और विस्तार करने की मंजूरी नहीं देना, जब तक की आवश्यक कारण न हो;
    • जब तक उचित कारण न हो तब तक बिल की देय तारीख में विस्तार न करना। इस प्रकार के विस्तार के लिए निगम का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना। किसी भी मामले में विस्तार प्रदान करने के पूर्व यदि निगम ने कोई शर्त निरूपित की है तो सुनिश्चित किया जाये कि शर्तों का अनुपालन किया जा रहा है।
    • जहां खरीदार द्वारा दस्तावेज़ों / माल को स्वीकार नहीं किया गया है तो माल की सुरक्षा के लिए तथा मूल खरीदार को उचित नोटिस देने के उपरांत वैकल्पिक खरीदार को माल की पुनर्बिक्री के लिए उचित कार्यवाही की जाये।
    • यदि पुनर्बिक्री संभव नहीं है तो ई सी जी सी के पूर्व अनुमोदन से माल को भारत वापस लाना ( यदि हानि सकाल इन्वाइस मूल्य के 25% तक हो तो)
    • जब तक खरीदार चूकाधीन बिल के लिए भुगतान नहीं कर देता उसे आगे और पोतलदान करने से बचें।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    fifteenखरीदारवार पॉलिसी ( अल्पावधि ) के अधीन हानि का निर्धारण कब किया जाता है ?


    समान्यतया देय तारीख से चार महीनों के पश्चात हानि का निर्धारण किया जाता है। दिवालियापन के मामले में प्राप्तिकर्ता द्वारा ऋण की स्वीकृति की तारीख के एक महीने के भीतर तथा देय तारीख से चार महीनों के भीतर , इसमे से जो भी पहले हो, हानि का निर्धारण किया जाता है। जहां प्राप्तिकर्ता द्वारा ऋण की स्वीकृति लंबित है तो हानि का निर्धारण करने के पूर्व निर्यातक से यह वचन प्राप्त करना होगा कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है अथवा ऐसा तथ्य नहीं छुपाया है जहां दिवालिया के एस्टटे पर उसका दावा अस्वीकार्य हो जाये। जहां हानि माल की अस्वीकृति के कारण हानि हुई हो तो हानि का निरूपण केवल उस माल के लिए किया जाएगा जहां माल की बिक्री अथवा निपटान ई सी जी सी के अनुमोदन से किया गया हो।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    sixteen खरीदारवार पॉलिसी ( अल्पावधि ) के अधीन निर्यातक कब दावा दायर कर सकता है ?


    पॉलिसी के अधीन निर्यातक , हानि के निर्धारण के पश्चात किसी भी समय परंतु पोतलदान दावे के लिए भुगतान की देय तारीख से एक वर्ष के भीतर दावा दायर कर सकता है।


    खरीदारवार पॉलिसी – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


    seventeen खरीदारवार पॉलिसी ( अल्पावधि ) के अधीन दावे की अदायगी पर भुगतान की वसूली के लिए निर्यातक को क्या उपाय किए जाने चाहिए ?


    दावे की अदायगी के पश्चात भी निर्यातक वसूली हेतु , निगम द्वारा निरूपित कार्यवाही , यदि कोई हो तो, सहित अन्य सभी उपाय करना जारी रखेगा। देयों की वसूली हेतु किए गए व्यय की राशि का वसूल की गयी राशि में सर्वप्रथम समायोजन किया जाएगा। वसूल की गयी राशि में से वसूली के प्रयासों के व्ययों को घाटा कर शेष राशि का ई सी जी सी के साथ उसी अनुपात में हिस्सेदारी की जाएगी जिस अनुपात में दावे की हिस्सेदारी की गयी थी।


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